प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुसुम-A योजना को अधिकारी लग रहे पलीता
जिम्मेदार मोन जवाब देगा कौन
रायसेन (म.प्र.)
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की कुसुम-A सोलर योजना के अंतर्गत ग्राम भूसी मेहता, जिला रायसेन की महिला कृषक भारती रैकवार द्वारा 2 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट पूरी तरह तैयार किया जा चुका है, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक प्लांट चालू (Commissioning) करने की अनुमति नहीं दी जा रही।
परमिशन न मिलने के कारण प्लांट से बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे महिला कृषक को प्रतिदिन लगभग 12,000 यूनिट, यानी करीब ₹39,000 का सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इतना ही नहीं, सोलर प्लांट के लिए लिए गए बैंक लोन पर हर महीने लगभग ₹30,000 की ब्याज और किस्त महिला किसान को अपनी जेब से चुकानी पड़ रही है, जबकि प्लांट तैयार होने के बावजूद एक यूनिट बिजली भी बेची नहीं जा पा रही है।
पीड़िता भारती रैकवार का कहना है—“
सरकारी योजना में भरोसा कर प्रोजेक्ट लगाया, लेकिन अधिकारियों की देरी ने मुझे कर्ज में डुबो दिया। रोज़ का नुकसान अलग, बैंक की किस्त अलग—अब गुज़ारा मुश्किल हो गया है।”स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि
तत्काल प्लांट चालू करने की अनुमति दी जाए,
और देरी से हुए नुकसान की जवाबदेही अधिकारियों पर तय की जाए।
अब सवाल यह है—क्या महिला किसानों को ऐसे ही कर्ज में डुबोया जाएगा, या कुसुम-A योजना का लाभ वास्तव में ज़मीन पर मिलेगा?
