पितृपक्ष ध्यान–धूप: बच्चों में संस्कार और संस्कृति का जीवंत संदेश”
मध्य प्रदेश धार जिले से जिला ब्यूरो चीफ सौभाग प्रजापति की रिपोर्ट“
मध्य प्रदेश धार जिले से जिला ब्यूरो चीफ सौभाग प्रजापति की रिपोर्ट“पितृपक्ष ध्यान–धूप: बच्चों में संस्कार और संस्कृति का जीवंत संदेश”
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“जहाँ संस्कार मिलते हैं और संस्कृति जीवित रहती है, वहीं भविष्य सशक्त बनता है।” इसी भाव के साथ लोकेशन। माँ नर्मदा महाविद्यालय, धामनोद में पितृपक्ष ध्यान–धूप का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों में अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, आस्था और सम्मान की भावना जागृत करना था।
पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित पखवाड़ा है। यह हमें यह सिखाता है कि जो वृक्ष अपनी जड़ों को नहीं भूलता वही सबसे मजबूत बनता है। पूर्वजों का आशीर्वाद जीवन में उन्नति, शांति और समृद्धि लाता है। इसलिए पितृपक्ष केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि कृतज्ञता और मूल्यों का उत्सव है।
डॉ. मनोज नाहर, चेयरपर्सन माँ नर्मदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी संस्कृति की जड़ों को जीवित रखते हैं। उन्होंने श्लोक साझा किया –
“ॐ पितृभ्यो नमः। यथा पितरः तिष्ठन्ति सुखिनः स्यात्, तथा पुत्रा एव स्यात्।”
जिसके अर्थ को समझते हुए कहा, जैसे पितर संतुष्ट और सुखी रहते हैं, वैसे ही उनके वंशज भी सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करते हैं। डॉ. नाहर ने कहा कि पितृपक्ष केवल परंपरा नहीं, बल्कि बच्चों को उनके पूर्वजों से जोड़ने और उन्हें आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम है। जब बच्चे इस संस्कार को समझते हैं और अपने जीवन में अपनाते हैं, तो उनका जीवन धर्म, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
निर्देशिका डॉ. रीना नाहर ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए जीवन में अनुशासन, धैर्य, आंतरिक शक्ति और नैतिक मूल्यों को सीखने का अवसर है। यह आने वाली पीढ़ी में संस्कार और आशीर्वाद का बीज बोने का माध्यम है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सामूहिक ध्यान और मंत्रोच्चार किया, जिससे परिसर में दिव्यता और शांति का अद्भुत वातावरण बना। ऐसे आयोजनों से बच्चों में कृतज्ञता, सहानुभूति और परिवार व समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। यह समाज में एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाता है।
अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं और उनमें सकारात्मक सोच तथा अच्छे संस्कार का संचार करते हैं।

