दादा-दादी के संग झूमे नन्हे कदम“ग्रैंडपेरेंट्स डे” पर भावनाओं से सराबोर हुआ विद्यालय परिसर स्नेह, संस्कार और मुस्कान से गूंजा धामनोद
संवाददाता सोभाग प्रजापति।
दादा-दादी के संग झूमे नन्हे कदम“ग्रैंडपेरेंट्स डे” पर भावनाओं से सराबोर हुआ विद्यालय परिसर स्नेह, संस्कार और मुस्कान से गूंजा धामनोद
धामनोद के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान। दिल्ली पब्लिक इंटरनेशनल स्कूल धामनोद मैं “ग्रैंडपेरेंट्स डे” का आयोजन ऐसा बना, जिसने पूरे परिसर को भावनाओं, उल्लास और पारिवारिक अपनत्व से सराबोर कर दिया। प्री-प्राइमरी के नन्हे विद्यार्थियों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ मिलकर ऐसा माहौल रचा कि हर आंख नम और हर चेहरा मुस्कुराता नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत आत्मीय स्वागत, तिलक एवं पुष्प अर्पण से हुई। इसके बाद बच्चों और उनके दादा-दादी ने संयुक्त रूप से खेल-गतिविधियों, गीत-संगीत और मनोरंजक प्रतियोगिताओं में भाग लिया। परिसर में गूंजती तालियों और ठहाकों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
“बच्चा वही बोलता है, जो वह सुनता है”
विद्यालय के संचालक विजय पारीक ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि बच्चों के कोमल मन पर हर शब्द की अमिट छाप पड़ती है। उन्होंने कहा 
“बच्चों से नकारात्मक नहीं, सकारात्मक भाषा में बात करें।
उन्हें डराकर नहीं, प्रेरित करके आगे बढ़ाएं।”
उन्होंने यह भी संदेश दिया कि यदि हम चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल से दूर रहें, तो बड़ों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना होगा, क्योंकि बच्चे अनुकरण से सीखते हैं।
भावुक हुए दादा-दादी
कार्यक्रम के दौरान कई दादा-दादी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब किसी विद्यालय ने विशेष रूप से उन्हें सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर उनके अनुभवों को महत्व दिया है।
अंत में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों के लिए विशेष ब्रंच की व्यवस्था की गई, जहां पीढ़ियों के बीच आत्मीय संवाद और स्मृतियों का आदान-प्रदान हुआ।
विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच संवाद, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को सशक्त बनाने का माध्यम हैं।
कार्यक्रम में विजय गाड्या, सुभाष पाटीदार, दीनबंधु पाटीदार, कमल पाटीदार, दिनेश पाटीदार सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
