भोपालमध्य प्रदेश

संसद का मानसून सत्र पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़कर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया

संसद का मानसून सत्र पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़कर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया

 

नई दिल्ली । संसद का मानसून सत्र पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़कर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया । मानसून सत्र के अंतिम दिन भी संसद में हंगामा बरकरार रहा। हंगामे के कारण सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा और राज्यसभा दोनों की ही कार्यवाही बाधित हुई ।

21 जुलाई से शुरू हुए सत्र के दौरान लोकसभा में चर्चा के लिए कुल 120 घंटे का समय निर्धारित था, लेकिन लगातार हंगामे के कारण लोकसभा में महज 37 घंटे ही चर्चा हो पाई। राज्यसभा में मानसून सत्र की कुल कार्यवाही 41 घंटे 15 मिनट चली। इस अवधि की उत्पादकता केवल 38.88 प्रतिशत रही। मौजूदा सत्र में सदस्यों को 285 प्रश्न, 285 शून्यकाल नोटिस और 285 विशेष उल्लेख उठाने का अवसर मिला, परंतु केवल 14 प्रश्न, 7 शून्यकाल नोटिस और 61 विशेष उल्लेख ही लिए जा सके।

संसद में इस बार बिहार एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पूरा गतिरोध रहा। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त और बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा किया। बिहार में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए बिहार के लोगों के वोट काटे गए हैं। विपक्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा के लिए आखिरी दिन तक अड़ा रहा। इस बीच, संसद में नारेबाजी, बिल फाड़कर फेंकने और तख्तियां लहराने जैसे कई घटनाक्रम देखने को मिले। संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

गुरुवार को मौजूदा संसद सत्र का आखिरी दिन था हालांकि हंगामे के कारण सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा और राज्यसभा दोनों की ही कार्यवाही बाधित हुई। राज्यसभा और लोकसभा दोनों में ही प्रश्नकाल नहीं चल सका और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। गौरतलब है कि प्रश्न काल के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद, सरकार के मंत्रियों से उनके विभाग संबंधी प्रश्न पूछते हैं। केंद्र के मंत्रियों द्वारा इन प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं। प्रश्नों के लिखित उत्तर भी सदन में प्रस्तुत किए जाते हैं। हालांकि मौजूदा सत्र के अधिकांश कार्य दिवसों में प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया और सत्र के अंतिम दिन भी सदन में यही स्थिति रही। दरअसल विपक्ष संसद में मतदाता सूची खासतौर पर बिहार में चुनाव आयोग द्वारा करवाए जा रहे मतदाता सूची के गहन रिव्यू पर चर्चा चाहता है, लेकिन आसन से इसकी मंजूरी नहीं मिली है।

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