‘सीड बॉल्स एवं पारंपरिक पौधों’ पर कार्यशाला सह व्याख्यान, एवं “एक पेड़ माँ के नाम” 7 दिवसीय अभियान एवं श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन हरियाली से पहल, भविष्य की राह — नवाचार, सेवा और प्रकृति के संगम की ओर एक कदम।
सोभाग प्रजापती की रिपोर्ट
‘सीड बॉल्स एवं पारंपरिक पौधों’ पर कार्यशाला सह व्याख्यान, एवं “एक पेड़ माँ के नाम” 7 दिवसीय अभियान एवं श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन
हरियाली से पहल, भविष्य की राह — नवाचार, सेवा और प्रकृति के संगम की ओर एक कदम।
माँ नर्मदा महाविद्यालय, धामनोद में दिनांक 21 जुलाई 2025, सोमवार को विज्ञान संकाय एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वावधान में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला सह व्याख्यान एवं श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम MNDC इनक्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य “सीड बॉल्स निर्माण एवं पारंपरिक औषधीय पौधों के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना था।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. राघव उपाध्याय उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें महाविद्यालय निदेशक डॉ. मनोज नाहर, निर्देशिका श्रीमती रीना नाहर* तथा प्राचार्या डॉ. प्रिया त्रिवेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रोफेसर राघव उपाध्याय ने निमाड़ क्षेत्र में पाई जाने वाली लुप्त प्रजातियों पर विशेष चर्चा की साथ ही उन्होंने अंजीर, गुग्गुल, सिंदूर, मधुकामिनी , तेजपत्ता जैसे महत्वपूर्ण पौधों की जानकारी साझा की जो पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्थानीय उद्यमिता के लिए भी अत्यंत उपयोगी हो सकते हैं।
डॉ. मनोज नाहर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाली आधारित सतत् नवाचार ही आज का भविष्य है। उन्होंने बताया कि सीड बॉल तकनीक और पारंपरिक वनस्पतियाँ विद्यार्थियों के लिए स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमिता के नए द्वार खोल सकती हैं साथ ही इस अभियान की विशेष व्याख्या करते हुए कहा —
माँ जीवन देती हैं, और एक पेड़ पृथ्वी को प्राण। अगर हर विद्यार्थी अपनी माँ के नाम एक पेड़ लगाए, तो यह प्रकृति और मातृत्व के प्रति सच्चा सम्मान होगा।
इस अवसर पर निर्देशिका श्रीमती रीना नाहर ने अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त करते हुए कहा
हर पौधा एक आशा है, और जब वह माँ के नाम लगाया जाए तो वह जीवन भर का आशीर्वाद बन जाता है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दोनों का समावेश होता है।
प्राचार्या डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने कहा 
सीखना सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए, प्रकृति भी हमारी सबसे बड़ी शिक्षक है। हरियाली अपनाना आज की आवश्यकता है, और हम सबको मिलकर यह प्रयास करना होगा कि हम अपने भीतर और बाहर दोनों जगह हरियाली ला सकें।
इस आयोजन के अंतर्गत “एक पेड़ माँ के नाम” पर आधारित 7 दिवसीय हरियाली अभियान की शुरुआत की गई। विद्यार्थी प्रतिदिन एक पौधा लगाकर संवेदनशीलता, कृतज्ञता और पर्यावरणीय चेतना का संदेश देंगे।
कार्यशाला में सीड टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को सीड बॉल्स निर्माण की तकनीक सिखाई गई, जिसमें विद्यार्थियों ने पूरे जोश से भाग लिया।इस आयोजन के अंतर्गत *”संकल्प 500 सीड बॉल्स” निर्माण एवं उनके वितरण* का लक्ष्य निर्धारित किया गया। छात्रों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मिट्टी, बीज एवं जैविक मिश्रण का प्रयोग कर 500 से अधिक सीड बॉल्स तैयार किए गए, जिन्हें आस-पास के सूखे क्षेत्रों में हरियाली लाने हेतु वितरित किया जाएगा।
कार्यक्रम की रूपरेखा एवं संचालन प्रोफ़ेसर सौरभ पाटीदार एवं प्रोफ़ेसर सचिन गलफट द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का समापन उपप्राचार्य डॉ. राघवेंद्र पाटीदार के आभार प्रदर्शन एवं शुभकामनाओं के साथ हुआ। यह आयोजन NSS और MNDC परिवार की ओर से हरियाली, स्वास्थ्य एवं ग्रामीण उद्यमिता को समर्पित एक प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आया।

